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Soulful Stories

Red Rose

कभी रखा होगा तुमने भी संभाल कर किताब में… एक लाल गुलाब, फिर देखा होगा उस किताब को खोल कर बार बार, पर फेका ना होगा उस किताब से… चाहें सूख चुका हो… वो लाल गुलाब …!!!

ये कहानी उसी लाल गुलाब की याद दिलाती है…..

ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी एक लड़की….
कीसिका इंतज़ार कर रही थी

मैं वहीं से गुजर रहा था….. कभी किसी लड़की को पहले ऐसे नहीं देखा…. सफ़ेद लिबास पर सुर्ख लाल दुपट्टा….
गुलाब की कली सी लग रही थी…. नज़रे ठहर गई उस पर… वो इधर उधर नज़रे घुमाती हूई, शायद यही सोच रही थी कि उसे कोई लेने क्यों नहीं आया अब तक ।

ट्रैफिक सिग्नल उस वक़्त रेड था….
इसलिए आसानी से रुक कर देख पा रहा था उसे,
कब सिग्नल रेड से ग्रीन हुआ इस बात की खबर ही नहीं रही…. पीछे से हॉर्न बजने लगे तब एहसास हुआ कि
जाना पड़ेगा अब यहां से…

खैर उस वक़्त तो में चला गया वहां से…. पर जहा मुझे पहुंचना था, उस रास्ते को तय करते वक़्त बस वो एक चेहरा और उसका सुर्ख लाल दुपटटा जहन में चल रहा था… यही सोच रहा था कि फिर कभी वो दिखेगी या नहीं, मुलाक़ात होगी क्या उससे कभी, इस तरह के कितने ही सवाल घूम रहे थे ।

जैसे तैसे रात गुजरी…. उसके ख्यालों के साथ…
पर में ये नहीं जानता था की अगली सुबह मेरे लिए ऐसी सुबह लेकर आएगी जो मुझे उसी लाल सुर्ख दुपट्टे के पास पहुंचा देगी…

मुझे आदत है उठते ही बालकनी से सुबह का सूरज देखने की… जैसे ही में पहुंचा मेरी नजर सूरज पर जाने से पहले घर के सामने वाली बालकनी में जा रुकी….

वहीं लाल दुपट्टा…. इस बार उसने पीला दुपट्टा पहना हुआ था…. खुले बाल…. सूरज को देखना भूल गया आज में…

मन किया अपनी आदतें बदल लू…. और बस हर रोज वहीं एक चेहरा देख कर ज़िन्दगी गुजार लू….।

कुछ दिन यूं ही गुजरे उसे देखकर मेरी सुबह होती और उसके ख्यालों में शाम ढल जाती ।

पर अचानक एक दिन वो दिखाई नहीं दी….
एक दो दिन बाद पता चला कि वो मेरे घर के सामने वाले घर में रहने आयी थी बस कुछ दिनों के लिए……

उसके लिए एक गुलाब लिया था मैंने, उसे वो गुलाब देने की ख्वाहिश बस ख्वाहिश बन कर ही रह गई ।
संभाल कर रख लिया मैने अपनी एक किताब में वो लाल गुलाब, जो मुझे उसके लाल सुर्ख दुपट्टे की याद दिलाता है ।

यादें कुछ ऐसी ही होती है, जब भी याद आए सुकून ही देती है, दिल के किसी कोने में हो या दिमाग के, कितनी भी धुंधला जाए , अपनेपन का एहसास देती है, कभी मिटती नहीं है… हमेशा रहती है उस सूखे गुलाब की तरह … जिसे मैंने आज भी संभाल के रखा है ।

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